Aayi Milan ki Bela – Mahakta Aanchal – आई मिलन की बेला – दिलचस्प अफ़साना – हुमैरा राहत

अम्मां बी ने कुछ गलत भी तो नहीं कहा साहिरा आपी। निदा ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए कहा।

“जरा ठन्डे दिमाग से सोचें, ऐसा कब तक चलेगा, अच्छे रिश्ते हमेशा नहीं आएंगे, वक्‍त भाग रहा है आपी।” “निदा में क्या करू तू ही बता?”

उसने अपनी हल्की सुर्ख होती गहरी आंखों को ऊपर उठाया। में जान बुझकर तो नहीं करती ऐसा, मेरी आदत ही ऐसी है।” उसका लहजा ज्यादा धीमा हो गया।

“आपी।’ निदा ने दबी हुई आवाज़ में कहा । “वह आदतें बदल लेनी चाहिए जो आपकी खुशबू का रास्ता रोके हुए हों ।

आपके लिए तकलीफ की वजह बनती हों । अब मेरी तरफ देखिए” निदा ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया “मुझ से वादा कीजिए आप अपने आपको बदलेंगी।”

वह बुत बनी खड़ी रही। “कीजिए न वादा…..” निदा ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा। “मैं कोशिश करूगी।” साहिरा ने शर्मिन्दा लहजा में कहा।

“वेरी गुड…..यह हुई न बात।” निदा ने उसे गले लगा लिया। मन्सूर शाह की वफात हुए 27 साल गुजर गए थे।

अम्मां बी हमेशा के लिए गांव छोड़कर बेवा बहू और पोतियों की ढारस बनने बड़ी हवेली शिफ्ट हो गई थीं।

उनका दिल नौजवान बहू को बेवगी के लिबास में देखकर बहुत कुढ़ता। उन्होंने कई बार इशारों में शाजिया बेगम से दूसरी शादी के लिए कहा, मगर शाजिया बेगम के लिए अब सब कुछ मन्सूर की निशानी यह दोनों बेटियां ही थीं।

वक्‍त गुजरता गया। शाजिया बेगम के बालों में सफेदी उतर गई। दोनों बेटियों के चेहरों पर जवानी फूलों में जौबन की तरह खिल खिला उठी थी।

एक अरसे तक खामोश रहने वाली मन्सूर हवेली अब छोटी निदा की हसीं शरारतों ओर कहकहों से गूंजने लगी। निदा जितनी शोख थी साहिरा उसके बिल्कुल बरअक्स थी।

निदा जितनी बातूनी वह इतनी ही खामोश सारे दिन में वह मुश्किल से तीन चार जुमले बोलती थी। बकौल अम्मां बी जब से उनकी समाअत कमजोर हुई है कई कई हफ्ते गुजर जाते हैं साहिरा की आवाज सुने यूं लगता है जैसे वह इस घर में है ही नहीं।

“अरे बेटा…. थोड़ा सा तो बोल लिया कर …इन बूढ़े कानों को हमेशा तेरी आस रहती है ।” अम्मां बी अक्सर उसे समझाती । “ठीक है अम्मां।”

वह भी अक्सर इतना ही कहकर चली जाती। “फिर एक दिन मन्सूर हवेली एक बार फिर खामोश हो गई। दो साल पहले साहिरा के लिए एक बहुत भले घर से रिश्ता आया। अम्मां बी को पूरा यकीन था कि रिश्ता तय हो जाएगा और उनका यकीन सच भी हुआ ।

फोन की घंटी बजते ही शाजिया बेगम ने बसब्री से फोन उठाया। कुछ देर बाद उन्होंने जितनी गरम जीशी में फाेन उठाया था उतने ही दुःख से रख दिया ।

अम्मां बी जो बड़ी तवज्जोह से शाजिया बेगम की तरफ देख रही थी और मन ही मन में सुशखबरी का इन्तिजार कर रही थीं। शाजिया बेगम को इतना परीशान देखकर चौंक गई।

“अरे, क्या हुआ बेटी? अम्मां बी ने घबराकर पुछा। “क्या बताऊं अम्मां! शाजिया बेगम ने तख्त पर तकरीबन गिरते हुए कहा।

“हुआ क्या है कुछ बोलेगी भी ।” अम्मां बी ने माथे पर सिलवटें लाते हुए कहा। ”अम्मां वह शहला बहन का फोन था ।” उन्होंने हकलाते हुए कहा।

“अरे यह तो अच्छी बात है।’ अम्मां बी ने पानदान गोद में रखा। “अच्छी बात नहीं है अम्मां।” शाजिया बेगम ने सर को झटका दिया।

“उन्होंने कहा है कि उन्हें अपने बेटे के लिए साहिरा नहीं निदा पसन्द है।” “हाय वह क्‍यों?” अम्मां बी ने सीने पर हाथ मारा।

“पता नही अम्मां, कहने लगी साहिरा भी बहुत प्यारी है मगर उन्हें अपने बेटे के लिए निंदा ज्यादा पसन्द है।” “ओह खुदाया….यह क्या हो गया। “अम्मां बी ने सरहाने से सर टिका दिया।

कई दिन घर में बहस चलती रही। आखिरकार निदा के रिश्ते के लिए हां कर दी गई । अब उसकी शादी को भी दो साल हो गए थे । मन्सूर हवेली बिल्कुल खामोश थी।

साहिरा जो पहले ही कम बातें करती थी अब वह और कम बोलने लगी। कुछ अरसे बाद चची नसीरा साहिरा के लिए एक और रिश्ता लायीं । घर भर में खुशी की लहर दौड़ गई।

अम्मां बी ने निदा को भी फोन कर दिया। आने वाले मेहमानों के लिए इस तरह तय्यारियां हो रही थीं जैसे अभी साहिरा की शादी हो रही हो। जर्द और फीरोजी कन्ट्रास्ट सूट में साहिरा बहुत खूबसूरत लग रही थी।

“आपी प्लीज! थोड़ी सी बात चीत भी करना अच्छे खुशगवार मूड में रहना। खामोश गुम सुम न बैठी रहना।” निदा ने यह बात उसे चौथी मरतबा समझाई थी। “अच्छा ठीक है निदा ।” वह अब झुंझला गई।


0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.