आइडियल – एक सबक देती कहानी – सायमा हैदर

“अरे हुमा! अभी तक मैली कचैली घूम रही हो। हम तो समझे थे तुम तैयार बैठी होगी।” “क्यों, क्या बात है आज?” “अरे बडी आपा की भांजी शाहिदा की मंगनी है।”

“वह किसके गले पड गई भई। किससे हुआ उसका रिश्ता? वह तो मुम्बई वाले किसी शहज़ादे का सपना देख रही थी।”

“उसकी मुरादें पूरी हो गयी हुमा! वह जैसा चाहती थी वैसा ही हुआ। उसके लिए मुम्बई से ही एक शहजादा आया। वह बड़ी किस्मत वाली है।”

“बड़ी आपा ने भी तो उसको शहजादियों की तरह रखा है। अभी तक चूल्हे के पास से भी गुजरने नहीं देती। दूसरा काम काज . .. खैर छोड़ो इन बातों को।”

“तुम जल्दी नहा धोकर तैयार हो जाओ। हम यहां तुम्हारा इन्तिजार करते है।” “यार! किस्मत हो तो ऐसी। क्‍यों राबी?”

“बुशरा! मुझे तो जलन हो रही है इस शादू की बच्ची से।” रानो ने दिल पर हाथ रख कर ठन्डी, लम्बी सांस छोडी।

“जाने अल्लाह मियां को कब तरस आएग़ा हम पर। हमने तो न सोना मांगा न हीरे मोती, न मुम्बई वाला, न मद्रासी। बस जल्दी से बना दे हमें भी किसी की घर वाली। क्यों राबी! ऐसे ही निकल जाए यह जवानी। फिर न मिलेगा पूने न दिल्‍ली।”

“रानो की बच्ची! तुम शाइर कबसे बन गयीं? और हां उसका क्‍या बना? यार! वही जिसके साथ तुम फिल्म देखने गई थीं। 

रास्ते में उसके साथ आइसक्रीम खाते हुए इकबाल भाई ने देखा फिर रात तुम्हारी पिटाई हुई थी। उस वक्‍त तो सारी शाइरी भूल गई थीं।

अब भी याद करो अपने रब को। उसी से कोई अच्छा रिश्ता भेजने की दुआ करो। जवानी निकल जाती है तो निकल जाने दो।

“लो भई मैं आ गई। ज्यादा देर तो नहीं लगाई मैंने?” अरे नहीं मेरी जान ऐसे मौकों पर तुम तो फटाफट तैयार हो जाती हो।” कहते रानो ने हुमा का मुंह चूम लिया।

“घंटा, डेट घन्टा भी कोई देर होती है भला। जरा ऊपर वाले को देखो। बीस सालों से बहार को बहारें दिखा रहा है मगर इसकी जिन्दगी में अभी तक कोई बहार नहीं ला रहा।

बहार! मेरी मान, किसी को पकड़ ले वर्ना दुसरो की बहारे देखती रह जाएगी।” “अरे अरे राबी! इस रानो की बच्ची को संभाल। यह तो निकली जा रही है।

रानो! तू तो आपे से बाहर हो रही है। इतनी बेखबरी भी क्या। वक्‍त आने पर सब ठीक हो जाएगा। अगर जवानी संभाली नहीं जाती तो भाग जा अपने वाले के साथ।”

“इकबाल अच्छा लड़का है। फिर तुम्हारी फुष्फो भी तुमको बहुत चाहती है।” “बस शुरू हो गए ताने देने। ताने ही देती रहना।

क्या हुआ यार अगर एक बार बाले के साथ फिल्म देखने गई। उसके साथ भागी तो नहीं?” “तो अब भाग ले। अब भी वक्‍त है।”

“भागें मेरे दुश्मन। तुम जैसी सड़ी सूरत लड़कियां अम्मां का पल्लू थामें  मां बाप के घर गल सड़ रही हैं तो मैं क्यों भागूं।

बस जरा देर इसलिए है कि अल्लाह मियां की समझ में नहीं आ रहा है कि वह मुझ जैसी खूबसूरत को किससे जोड़े।

तुम लोगों को तो पता है रिश्ते ऊपर ही जुड़ते हैं। देखो बहार! तुम्हारी सूरत शक्ल अच्छी नहीं है तो बातें ही अच्छी किया करो।

क्या पता तुम्हारी कोई बात अल्लाह मियां को पसन्द आए और तुम्हारे लिए कोई अन्धा, काना या लंगड़ा ही भेज दे। समझी मेरी प्यारी बहारो!”

“तुम लोग यहाँ पहेलियाँ ही बुजाहते रहोगी या जाओगी भी शाहिदा के पास। बेचारी की मंगनी है। व बेचैनी से दोस्तों इन्तिजार कर रही होगी।”

“सच बताओ भाभी! बहुत बेचेनी हो रही थी ना?” “रानो की बच्ची! कुछ छोटे बड़ों का भी ख्याल किया करो। हर वक़्त मजाक, हर वक्‍त मजाक।”

भाभी ने प्यार से झूटी डांट पिलाई। “हाय मैं मर जावां इस शर्म वाली मुस्कुराहट और मीठी मीठी डांट पर। पर भाभी! एक बात बताओ क्या शादी होने पर लड़की अपनी सहेलियों में बड़ी हो जाती है?”

“मुझे नहीं मालूम। मेरी समझ में नहीं आती तेरी उल्टी सीधी बातें। चल छोड़ मेरा दुपट्टा।” ओर भाभी चली गयीं।

“देखो रानो! तुम्हें यही सब करना है? वहां मसखरा पन बिल्कुल नहीं। अरे सोचो जरा वह मुम्बई वाले पढ़े लिखे लोग हैं। उनके सामने तुम्हारा मसखरा पन अच्छा लगेगा भला।” बहार ने आंखें निकाली।

नूरां ने झट खाली प्लेट उसकी आंखों के सामने कर दी। “यह क्या कर रही हो नूरां?” देखती नहीं बहार ने दीदे कितनी निकाले हैं। नीचे गिरेंगे तो मिट्टी लग जाएगी इसलिए मैंने प्लेट लगा दी है।”

“छोड़ बहार! यह तो नहीं मानेगी। चलो देर हो गई है। शादू भी नाराज होगी और बड़ी आपा भी तुम तो जानती हो उनको। पता नहीं कबसे हमारा इन्तिजार करती होंगी।

कितने काम रखे होंगे हमारे लिए। आखिर मंगनी का घर है। मुम्बई से मेहमान आने वाले हैं। क्‍या क्‍या इन्तिजाम करने हैं। हम ही तो बताएंगे ना बड़ी आपा को।

वह नहीं चाहती कि अपने भाई या उनके साथ आने वाले लोग किसी बद इन्तिजामी का शिकार हों।”

बड़ी आपा के खानदान के कुछ लोग मुम्बई चले गए, कुछ लोग दिल्‍ली ही में आबाद हुए। बड़ी आपा के ससुराल वाले खेती बाड़ी करते थे।

यहां भी उन लोगों ने खेती बाड़ी को अपनाया। उनके शौहर ने होटल का काम शुरू किया। उस वक़्त उनके कोई औलाद नहीं थी।

धीरे धीरे यह लोग जम गए। कारोबार ठीक ठाक। अल्लाह तआला ने उन्हें बच्चे जैसी नेअमत से भी नवाजा था। पहले दो लड़के फिर एक लड़की जिसका नाम बड़ी आपा ने शाहिदा रखा था।

सब प्यार में शादू  कहते थे। एक ही बेटी थी इसलिए आपा को बहुत प्यारी थी। आपा बहुत मुहब्बत करती थीं अपनी बेटी से।

और अब उसकी शादी का वक्‍त  आया। फिर भी उसको चूल्हे हान्डी के करीब जाने नहीं दिया। बिरादरी वालों ने उसका नाम फूला रोनी रखा था।

इस फूहड़ लड़की से बिरादरी में कोई शादी करने को तैयार नहीं था।


3 Comments

  • Pappu khan · June 5, 2020 at 1:48 am

    Ideal page 6 why not open

      Admin · June 5, 2020 at 11:53 am

      Pappu Bhai, ये पेज Lock है आप दो ऑप्शन में से कोई भी एक option सेलेक्ट करके इसे unlock कर सकते है, या तो आप इसे Twitter पे share कर सकतें है या हमारा Facebook page like कर सकते है

    Pappu khan · June 5, 2020 at 1:08 pm

    Replay replay k liye thanks ho sake to thodi jayada story post kare

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.