Jo Maine Kiya – Tarannum Saba – Kanpur

वह बहुत खूबसूरत थी। चान्द से गोल मुखड़े पर समन्दर सी नीली आंखें, सुतवां नाक याकूती लब और कमर से नीचे आते लम्बे घने हल्के भूरे बाल ।

लेकिन शायद यूनीवर्सिटी के लोगों को उसका हुस्न नज़र नहीं आता था जो -कभी किसी ने कोई कमेन्‍्ट तक पास नहीं किया था। उस पर उठने वाली नजरों में उसके लिए सताइश (तारीफ) होती थी, इज्जत होती थी।

किसी ने उससे कभी कोई बदतमीजी नहीं की थी। उस वक्‍त भी वह छोटे छोटे कदम उठाती चली आ रही थी, जब रैलिंग से टिक कर खड़े . अली ने उसे पुकारा था।

“हेलो सहर! हाउ आर यू” “आई एम फाइन! थैंक्य, वैसे यह सवाल तो मुझे आपसे करना चाहिए, क्योंकि ओप कई रोज बाद नज़र आ रहे हैं।” उसने मुस्कुरा कर कहा अली हंस दिया ।

“बस पढ़ते पढ़ते उकता गया था सो फ्रेश होने के लिए…….। “यूनीवर्सिटी गोल कर गए।” उसने हंस कर अली की बात काटी-“वैसे मेरे ख्याल में तो पढ़ाई से ज़्यादा फ्रेशनेस और किसी चीज में नहीं होती।”

“प्लीज़ शर्मिन्दा मत कीजिए ।” “यह काम मैं कभी नहीं करती।” वह मुस्कुरा दी। अली शमिन्दगी से सर खुजाने लगा।

“सहर! मुझे आपकी हैल्प चाहिए ।” वह मदद तलब नजरों से उसे देखने लगा। “मैं जानती हूं आपको क्‍या मदद चाहिए यूं.बेचारी सी शक्ल मत बनाइये मुझसे नोटस ले लीजिएगा।”

वह शरारती लहजे में बोली और आगे बढ़ गई । वह दोनों एक ही क्लास और एक ही डिपार्टमेन्ट में थे। अक्सर आपस में एक दूसरे की मदद करते रहते थे।

“तुम लोग यहां क्या कर रहे हो क्लास नहीं है क्या?” सहर ने आरजू, ज़की और काजल को टहलते हुए देखकर पूछा। “क्लास तो है प्रिंसेज! मगर इंग्लिश के सर गुप्ता नहीं हैं।”

काजल ने उसे सताइशी (तारीफी ) नज़रों से देखते हुए कहा । गाजरी और सफेद कन्ट्रास्ट के सूट में सर पर दुपट्टा और कानों में बड़ी बडी बालियां डाले वह सच मुच कोई शहज़ादी लग ही रही थी।

गुलाबी लबों पर पिंक लिपिस्टक, एक हाथ में गोल्डन कड़े और दूसरे में गोल्डन चेन की घड़ी लगाए वह सादगी और सजावट का मिला जुला रूप थी।

“अब जब सर ही नहीं हैं तो पढाई कहां से होगी सो हम भी मस्तियां मार रहे हैं आज ।” जकी हंस कर बोला । “तो चलो पार्क में चलते हैं।” सहर कहते हुए आगे बढ़ गई ।

वो सब भी उसके साथ चल दिए। जकी दो चार छलांगों में ही रैलिंग पार करके उनसे पहले पार्क में पहुंच चुका था। “इसे देखकर यकीन हो जाता है कि हमारे बुजुर्ग बन्दर ये।” आरजू ने शरारत से कहा, वो दोनों हंस दीं।

“यूनीवर्सिटी आने का एक फाइदा तो होता है यार! कि यहां मुफ्त में बड़े रंगीन नजारे मिल जाते हैं।” अपने पीछे कमेन्ट सुनकर उन्होंने मुड़ कर देखा। वो दो लड़के थे जो थर्ड इयर की बेला मुराद को बड़ी कमीनगी से देख रहे थे।

बेला मुराद तीखे नकूश और सांवली रंगत वाली थी। उसे खूबसूरत तो नहीं कहा जा सकता था, लेकिन फुल मेकअप और टाइट स्लीवलेस ड्रेस ने उसे देखने लायक चीज़ बना दिया था।

उन लड़कों की बात पर बेला ठिठकी। वो तीनो भी उनसे थोड़ी दूर पर रूक गई थीं। “किसे कह रहे हो तुम लोग ।” उसने तीखे लहजें में पूछा ।

“अरे यार इस शो पीस में तो दिमाग की मिक्सिंग भी है। हम तुम्हें ही कह रहे हैं डार्लिंग।” उनमें से एक लड़का बड़ी बेहूदगी से बोला ।

“हाऊ डेयर यू । मुझसे बदतमीजी करने की हिम्मत कैसे हुई तुम लोगों की मैं अभी तुम लोगों की शिकायत करती हूं।” बेला मुराद गुस्से से तिलमिला उठी।

“ओ मैडम! ज्यादा रौब मत दिखाओ हमें। पहले अपने आपको देखो । खुद तो फूल बनकर महकती हो और चाहती हो कि भौंरा भी न आए।

जब इतना हथियारों से लैस होकर निकलोगी तो कोई न कोई तो जख्मी होगा ही।” वह दोनों बहुत ढीट थे। उन पर बेला के गुस्से का कोई असर न हुआ।

“और सुनो! यह धमकियां हमें मत दो। हम डरने वाले नहीं हैं और आज तो मुआफ . किया, मगर आइन्दा कभी हमें चैलेंज किया ना तो अपना अंजाम खुद सोच लेना ।

इतना ही बुरा लगता है तो माडल बनी क्यों फिरती हो ।” वह दोनों सिर्फ ढीट ही नहीं खतरनाक भी थे । उनकी नजरें अब और भी बेबाकी से बेला के गहरे गले पर जमी थीं।

अब तक अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई थी। बैला मुराद गुस्से और बेइज्जती के एहसास से सुर्ख़ चेहरा लिए पैर पटखती वहां से चली गई। वह दोनों लड़के खबासत से हंस रहे थे। आरज़ू तो धीरे से बड़बड़ा उठी ।

“यह आती भी तो ऐसे है जैसे किसी फैशन शो में जा रही हो ।” “छोड़ो उसे चलो ।” सहर कहते हुए आगे बढ़ गई।

“वाह भई मुझे नोटस देने का वादा किया और दिए बिना ही यहां चली आईं।” अली उसे शिकायती नजरों से देखता हुआ वहीं बैठ गया। “सोरी अली! आज तो मैं नोटस नहीं लाई। कल ले लीजिएगा।” वह नर्मी से बोली ।

“थैंक्स इन एडवान्स ।” वह सर झुका कर शरारत से बोला। “एडवान्स में क्यों? कल थैंक्स कहने में तुम्हारी जबान को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी क्या?” आरजू बोली ।

इससे पहले कि कोई उसकी बात का कुछ जवाब देता, चटाख की तेज आवाज वहां गूँज उठी। वो सब घूम कर पीछे देखने लगे।

वह असमा नबील थी जिसने मैथ डिपार्टमेन्ट के सुहेल आजमी को जोरदार थप्पड़ मारा था और अब बुरी तरह गरज रही थी। “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मुखातिब भी करने की।

मैं तुम जैसे बेहूदा लड़कों को अच्छी तरह जानती हूं । बहाने बहाने से शरीफ लड़कियों से बात करने की कोशिश करते हो। मुझे ऐसी वैसी लड़की समझ रखा है तुमने।

तुम जैसे आवारा लड़के की तरह देखना भी मैं अपनी तौहीन समझती हूं। आइन्दा मुझसे बात करने की कोशिश मत करना, वर्ना और बुरा हश्र कर दूंगी।” असमा हिकारत से उसे देखती हुई तेज़ तेज कदमों से चली गई।

असमा नबील एक मिडिल क्लास घराने से ताल्लुक रखती थी। वह सिर्फ तालीम की गरज से अपने शहर से दूर हास्टल में रह रही थी ।

READ ALSO:  वफ़ा के रिश्ते - शाइस्ता साजिद - महकता आँचल बुक स्टोरी इन हिंदी

अपने शहर से दूरी का एहसास था या अकेले रहने का खौफ जो भी था असमा सबसे लिए दिए ही रहती थी। वह ज्यादा किसी से घुलती मिलती भी नहीं थी।

उसके रवय्ये में एक अजीब सख्ती और गुरूर था और आज तो उसने सुहेल आजमी को थप्पड़ ही मार दिया था। कई लोगों ने यह सब देखा था।

सुहेल आजमी का चेहरा अपनी बेइज्जती पर तमतमा रहा था | उसने एक सुलगती नज़र दूर जाती असमा नबील पर डाली और लम्बे लम्बे डिग भरता वहां से चलागया।

“बहुत गलत किया असमा ने। सुहेल ने सिर्फ इतना ही कहा था कि आज आप पार्क में कैसे आ गईं। आप तो क्लास और लाइब्रेरी के अलावा कहीं नज़र ही नहीं आती।

आपको देखकर तो लगता ही नहीं कि आप इसी दुनिया की मखलूक हैं और असमा ने इतनी सी बात पर उसे थप्पड मार दिया।” ज़की अफसोस से बोला।

“शरीफ लड़कियां ऐसा ही करती हैं ।” नाजिया अलवी के मग्ररूर अन्दाज में कहने पर अली भी सुलग उठा।

अच्छा वह शरीफ है और यूनीवर्सिटी की बाकी सभी लडकियां तो आवारा ओर बदकिरदार है ना। एक वही तो है बड़ी पारसा । अरे बन्दा एक दूसरे से बात करता ही है

इसका यह मतलब तो नहीं कि बस थप्पड़ ही दे मारो । मैं पूछता हूं अगर उसे इतना ही पर्दे में रहने का शौक है तो क्यों आई यूनीवर्सिटी किसी दीनी मदरसे में चली जाती। जहां उसे देखने वाला कोई न होता।

अपनी इज्जत और पारसाई का बड़ा घमन्ड है उसे । सभी जानते हैं कि सुहेल कितना शरीफ लड़का है । आज तक किसी लड़की से उसने बदतमीजी नहीं की और यह असमा नवील…. ।” अली ने दांत पीसे ।

“यह मोहतरमा अपने आपको कुछ ज्यादा ही अफलातून समझती हैं। इतनी सादा रहती हैं जैसे सादगी इसी से शुरू होकर इसी पर खत्म हुई है। किसी को खातिर में ही नहीं लाती।

पर्दा तो ऐसे करके आती है जैसे किसी लड़के ने इसे देख भी लिया तो यह मैली हो जाएगी और खदा जाने इस पर्दे के अन्दर कितनी बेपर्दगी जलवा दिखा रही होगी ।” जकी भी तिलमिला उठा।

जो मंह में आया बोलता चला गया | नाजिया तो एक दम चुप हो गई। बाकी सब भी सरगोशियों में बातें कर रहे थे। वो तीनों चुपचाप वहां से चलीं आईं।

“असमा ने सुहेल को थप्पड़ मार कर अच्छा नहीं किया। सुहेल वाकई बहुत शरीफ है।” काफी देर की खामोशी के बाद काजल ने कहा।

“शरीफ है इसीलिए तो उसने असमा से कुछ नहीं कहा । उसकी जगह कोई और होता तो पता नहीं क्या कर गुज़रता । देखा नहीं सब कितना तैश में आ गए थे।” आरज़ू बोली।

वो तीनों इस वक्त एक खाली क्लास रूम में बैठी थीं। उनकी आवाज़ों पर बाहर से गुज़रतें अली और ज़की रूक गए । “सुहेल शरीफ है आरजू बुजदिल नहीं और अपनी बेइज्जती तो किसी से भी बर्दाश्त नहीं होती ।” सहर संजीदगी से बोली-

“जानती हो दुनिया में दो ही तरह के लोग नज़रों का मरकज बनते हैं । एक वो जो खुद को बहुत जाहिर करते हैं और दूसरे वो जो खुद को बहुत छुपाते हैं। बेला मुराद की शक्ल में तुम लोग पहली तरह को देख चुकी हो।

असमा नबील दूसरी केटेगरी में आती है। खुद को छुपाने की कोशिश में वह सब पर जाहिर हो जाती है ओर बेला मुराद जान बूझ कर खुद को जाहिर करती है । इन्सान को और खास कर लडकियों को तो नार्मल रहना चाहिए।

घर से बाहर निकली है तो हर तरह के लोगों से सामना होगा। अच्छे भी बुरे भी। सबको फेस करना पड़ता है और मर्दों से तो हर जगह वास्ता पड़ता ही है ।

यह तो आप पर डिपेन्ड करता है कि आप उनसे ऐसे बिहैव करें कि वह आपकी इज्जत करें न कि बदतमीजी ।

खुदा का शुक्र है कि हम सब बदसूरत नहीं, लेकिन अपनी खूबसूरती का इश्तेहार भी नहीं लगाते, बेला की तरह ओर न ही असमा की तरह खुद को छुपाने की ओवर कोशिश करते हैं।

नार्मल तय्यारी, नार्मल अन्दाज, न हमें, कोई परीशानी न लोगों को शिकायत । असली पर्दा तो नजर का होता है।

आंखों में हया न हो तो दो गज की चादर भी कुछ नहीं कर सकती और निगाहों में शर्म हो तो सर पर पड़ा आचल भी मुहाफिज बन जाता है और ऐसा तो नहीं है ना कि लड़कों की कोई इज्जत नहीं होती ।

सुहेल एक मर्द है और मर्दों में इज्जतो गैरत से ज़्यादा “इगो” होती है । उसकी अना को कभी ललकारना नहीं चाहिए वर्ना मर्द कितना ही शरीफ क्‍यों न हो, ऐसे काम कर जाता है जो उसने खुद भी नहीं सोचा होता

सुहेल वाकई बहुत अच्छा लड़का है, लेफिन असमा ने थप्पड़ मार कर उसकी “इगो” को चैलेन्ज कर दिया हैं मुझे डर है इसका अन्जाम कहीं खतरनाक न हो । ” सहर की आवाज से फिक्रो तशवीश झलक रही थी ।

काजल और आरज भी खामोश थीं। बाहर खड़े अली और जकी आज सहर की खुशदिली का राज जान पाए थे | वो दिल से उसकी ज़हानत और दूर अन्देशी के कायल हो गए थे।

वक्‍त का काम है गुज़रना और वह बिना किसी रुकावट के गुज़रता रहता है। उस पर किसी खुशी, ग़म, खास या आम बात का कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन वो लोगो की जिन्दगियों पर असर अन्दाज जरूर होता है।

जैसे इस वक्‍त पूरे डिपार्टमेन्ट में एक ही ख़बर ने सबको अपने असर में ले रखा था और वह खबर थी असमा नबील की किडनैपिंग की । डिपार्टमैन्ट में यह बात कैसे फैली यह तो पता नहीं था, लेकिन सब दबी जबान में इसी बारे में बात कर रहे थे ।

कुछ असमा का उतरा हुआ चेहरा भी इस खबर की सच्चाई की तस्दीक कर रहा था। “असमा पूरी रात घर से बाहर रही है।

वह किसके साथ रही, कहां रही किसी को नहीं पता।” बेला मुराद घीमे लहजे में बोली। क्लास आफ होने के बाद वो सब पार्क में जमा थीं। हो सकता है वो किसी के साथ न गई हो किसी ने यूं ही अफवाह उड़ा दी हो।” आरजू ने कहा।

READ ALSO:  फूल जैसे रिश्ते - एक कहानी एक सबक

“यह कोई मजाक नहीं है आरजू! एक लड़की की इज़्ज़त का सवाल है। कोई इतनी बड़ी अफवाह यूं ही नहीं उडा देगा ।” बेला अपना दुपट्टा सर पर जमाते हुए बोली ।

वक्‍त बहुत बड़ा उस्ताद है। यह इन्सान को सब कुछ सिखा देता है गुज़रे हुए वक़्त ने बेला मुराद को भी बहुत कुछ समझा दिया था ।

उसका लिबास और तौर तरीके फेशन और मार्डनिज्म की दौड़ से निकल कर शराफत और सलीके की हुदूद में दाखिल हो चुके थे ।

उसने खुद ही सहर वगैरह की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था । उसके बदले अन्दाज देखकर लोगों ने भी उसे खुले दिल से वैलकम कहा था।

“ख़बर सच्ची हो या झूटी । असमा तो बदनाम हो रही है ना।” सहर अफसोस से बोली।

गुरूर तो ऊपर वाले को किसी बात का भी पसन्द नहीं, फिर चाहे वो पारसाई का ही क्यों न हो।” पास से गुजरते सुहेल आजमी ने उनकी बातें सुनकर मजाक उड़ाने वाले लहजे में कहा और आगे बढ़ गया।

वो सब चुपचाप बेठी रह गई। कुछ कहने की पोजीशन में ही नहीं थीं। “आज कल मौसम कितना हब्सजदा हो रहा है।” काजल रूमाल से पसीना पॉछते हुए बोली ।

“मुझसे तो प्यास के मारे चला ही नहीं जा रहा।” सहर कहते हुए एक टूटी हुई दीवार पर टिक गई । वो लोग क्लास लेकर निकले थे।

मौसम के मिजाज ने सभी को परीशान कर रखा था। “आप लोग यहीं रूकिए हम पानी लेकर आते हैं।” अली और जकी से उन लोगों की हालत देखी नहीं गई । वो दोनों पानी लेने चले गए।

काजल सहर और आरज़ तीनों बातें कर रही थीं । जब उन्हें दीवार के दूसरी जानिब से सुहेल आजमी की आवाज़ सुनाई दी । दीवार का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा टूटा था जिस पर सहर टिकी हुई थी |

बाकि की दीवार सही थी। सुहेल वहुत धीमी आवाज़ में किसी से बात कर रहा था। आप इस सुनसान जगह पर क्या कर रही हैं मिस नवीला आपको तो सबके साथ होना चाहिए ।

इस तरह वीरान जगह पर तन्‍्हा रहना आपके लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।” सुहेल की आवाज में तन्ज झलक रहा था।

उन तीनों के अलावा अभी अभी पानी लेकर लौटे अली और ज़की ने भी एक दूसरे की तरफ देखा | वो सभी बखूबी समझ गए थे कि सुहेल असमा नवील से बात कर रहा है।

“तुम….जलील इन्सान तुमने म॒झे किसी से नजरें मिलाने के काविल नहीं छोड़ा ।” असमा की रोती हुई आवाज़ आई। “मैं…में ने क्या किया है?” सुहेल हंसा। “तुम्हीं ने मुझे किडनैप किया था सुहेल!” असमा मुसलसल रोए जा रही थी।

“अच्छा! क्या सबूत है तुम्हारे पास कि मैंने तुम्हें अगवा किया।” सुहेल का मजाक उड़ाता लहजा वो सभी बाआसानी से सुन रहे थे । “तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वह मैं ने नहीं, बल्कि तुम्हारे गुरूर, तुम्हारी बेवकूफी और तुम्हारी बेजा अकड़ ने किया ।

अपने घमन्ड में तुम यह भूल गई थीं कि तुम एक औरत हो और औरत कितनी भी स्ट्रांग क्यों न हो जाए मर्द की पकड़ से कभी बाहर नहीं जा सकती।

अगर मर्द के अन्दर का शैतान जिन्दा हो जाए ना तो औरत की बिसात एक चिड़िया से ज्यादा नहीं होती । जिसके पर नोच कर वह उसकी परवाज को कभी भी हमेशा के लिए खत्म कर सकता है।

शुक्र करो कि मेरे अन्दर का शैतान इतना बेदार नहीं हुआ, वर्ना अभी जो तुम किसी से नज़रें मिलाने के काबिल नहीं हो, किसी को मुंह दिखाने के काबिल भी नहीं रहती ।” सुहेल की आवाज कांटेदार कोड़े से भी ज्यादा कटीली थी।

वो तीनों तो थर्रा उठी थीं। असमा की हालते गैर का वो आसानी से अन्दाज़ा लगा सकती थीं। अली और जकी के चेहरे पर सन्नाटा फैल गया गया था।

“तुम मुझ जैसे लड़के की तरफ देखरना भी अपनी तौहीन समझती थीं। तो मैं भी तुम जैसी लड़की को छूना अपनी तौहीन समझता हूं। असमा नबील! मेरी दादी अक्सर कहती हैं।

थाली जमीन पर गिरती है तो सिर्फ उसके गिरने की आवाज सुनाई देती है। थाली टूटी या बची, कोई नहीं देखता। तुम भी ऐसी ही एक थाली हो जिसके गिरने की सबने आवाज सुनी है।

जाओ दुनिया को अपनी उस पारसाई और पाकीज़गी का यकीन दिलाती रहो जिसकी तुम इकलोती गवाह हो और जिस पर तुम्हें बहुत युरूर था।

यह हकीकत है कि में ने तुम्हें हाथ तक नहीं लगाया, लेकिन कभी कभी हकीकत के आईने पर भी गलत फहमी और गलत बयानी की इतनी धूल जम जाती है कि साफ करते करते

हाथ लहूलुहान हो जाते हैं तुम चाहो तो मुझे अगवा के केस में अरैस्ट करवा कर अपना और ज्यादा हमाशा बनवा सकती हो । मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ।

जाते जाते तुम्हें एक पुरख़ुलूस मशवरा दे रहा हूं। आइन्दा अपनी ओकात से ज्यादा ऊंची उड़ान भरने की कोशिश मत करना वर्ना नतीजा वही होगा जो डोर से बंधी एक पतंग का होता है।

डोर से टूटने के बाद पतंग का ठिकाना कहां होगा, उसे खुद भी पता नहीं होता। मैं भी क्या करूं असमा नबील! मैं अपनी फितरत से मजबूर हू मैं शरीफों के साथ शरीफ जरूर हूं, मगर मेरी तबीअत अजीब इन्तिकामी टाइप की है।

जब तक अपनी बेइज्जती का बदला न ले लूं मुझे चैन नहीं मिलता । मैं जानता हूं, मैं ने जो किया वह गलत था लेकिन जो तुमने किया वह भी सही नहीं था और ग़लत के साथ ग़लत करने में मुझे कोई अफसोस नहीं है ।”

सुहेल ने सख्ती और जज़्बात से आरी लहजे में कहा और वहां से चला गया। अब वहां असमा नवील की बेबस सिसकियां फैली थीं जिन्हें सुनने वाला उन पांचों के अलावा और कोई नहीं था।

-Tarannum Saba – Kanpur

Read more

This Post Has 3 Comments

  1. Piya

    Ye 3 page me hi h

  2. Sadaf khwaja

    Mujhe bhi apni story mahekta aanchal Mai chhapvani hai kese ch
    hapegi

  3. Areeba ansari

    Or story kaise pad he

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.