खजूर (Dates) खाने के फायदे – हर मरज़ की दवा

कुरआन शरीफ मे खजूर (Dates) का ज़िक्र बार-बार आया है। हमारे हुज़ूर प्यारे नबी (صلى الله عليه وسلم) ने इरशाद फरमाया कि जिस घर में खजूर का पेड़ न हो वह घर ऐसा है जहां खाने को कुछ न हो। Science ने इस बात की अब तस्दीक कर दी है कि खजूर एक ऐसी खास और मुकम्मल खूराक है जिसमें तमाम जरूरी चीजें अच्छी मिकदार में पाई जाती हैं।

यह गिजाइयत से भरपूर फल है। मिज़ाज़ के एतबार से गर्म व तर है। इसमें बरसात से पैदा होने वाली सुस्ती व कमज़ोरी को दर करने की सलाहियत पाई जाती।

खजूर के फायदे-Khazoor ke Faide

यह हाज्मे की खराबी और तबीअत में मौजूद चिड़चिड़ापन भी दूर करती है। यह सब ही फलो से अच्छी मानी जाती है। खजूर का पेड़ आमतौर पर चौथे साल फल देना शुरू करता है। इसकी देखभाल की जाए तो एक पेड़ से एक मन से चार मन तक ताजा खजूर हासिल हो सकती हैं। फल को गर्द, बारिश, परिन्दों और कीड़ो से बचाने के लिए आमतौर पर थैलिया चड़ा दी जाती हैं।

खजूर के पेड़ की सभी चीज़े है काम की

खजूर के दरख़्त के तमाम हिस्से काम आते हैं। पत्तों से झाड़ू, चटाइया, टोकरिया और पंखे बनते हैं। तने से शहतीर और पानी की नालियां और रेशेदार छाल से रस्से बनते हैं। खजूर की बहुत सी किस्मे हैं। डोका पंजाब में मशहूर है। इस खजूर का रंग सब्ज से पीला और कुछ किस्म में लाल हो जाता है। खजूर का फल एक तरफ से पक कर मुलायम हो जाता है।

रंग के बदलने पर मिठास बढ़ती है। खजूर पेड़ पर चन्द रोज़ रहे तो मुकम्मल पक जाती है। सिन्धी जबान में इसे ‘वान पकील’ यानि पेड़ की पकी हुई कहते हैं। इसमें खजूर का रंग पिले से भूरा हो जाता है। लाल खजूर हलकी सियाह हो जाती है। अरबी में इसे तमर कहते हैं।

जुलाई में डोका तय्यार होने पर उसे मिट्टी के कोरे घड़ों में नमक की मुनासिब मिकदार शामिल करके बीस से तीस मिनट तक हिलाया जाता है। खजूर इस तरह पक जाती है। पका हुआ फल चटाइयों पर धूप में बिखेर कर खुश्क किया जाता है। खजूर को पानी में उबाल कर चटाई पर खश्क करके छुहारे बनाए जाते हैं।

खजूर में ढेरों पोषक पाए जाते है

खजूर में फाइबर, विटामिन ए और बी, केल्शियम, पोटाशियम, फौलाद, जस्त और दीगर गिजाई अज्जा शामिल होते हैं। कोलेस्ट्रोल बिल्कुल न होने और चिकनाई कम होने की वजह से यह फल दिल के मरीजों को ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। खजूर पैदा करने वाले सहराई मुमालिक में लोग शदीद सर्द रातों में बारीक पिसी हुई खजूरें तिलों के तेल के साथ अक्सर इस्तेमाल करते हैं।

एक हकीम का कौल है कि मर्द तीन चीजों का इस्तेमाल करे तो वह कभी बूढ़ा नहीं होता। वह है खजूर, भुने हुए चने और पके हुए बेर। खजूर के फायदो का जिक्र मुख्तलिफ हदीसों में भी मौजूद है।

खजूर के फायदे

इसमें ऐसे अज्जा पाए जाते हैं जो कि गुर्दों, मसाने और पित्ते में पथरी बनने के अमल को रोकते हैं। जैसा कि हदीस में बयान किया गया है कि दिल के दौरे में अज्वा खजूर गुठली समीत कूट कर खिलाना जान बचाने का बाइस होता है। इस गरज के लिए दूसरी खजूरें भी इस्तेमाल की जाती हैं। मगर इनके इस्तेमाल का अरसा तवील होना चाहिए।

Khajoor खाने के फायदे

चूंकि खजूर हर बीमारी को दूर करती है इसलिए बलग़मी दमे के लिए मुफीद होती है। खजूर को दूध में पका कर पिलाना ज़्यादा मुफीद होता है और इसकी मिकदार एक वक्‍त में एक सौ साठ ग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

सर्दियों में रात को सोते वक्‍त गर्म दूध के साथ इस्तेमाल करने से यह दिल व दिमाग को बेपनाह ताकत देती है। इसके अलावा यह आसाबी कमजोरी को भी दूर करती है। अगर पकी हुई खजूरों को पानी मैं भिगो कर उनका पानी पिया जाए तो पेचिश और दस्त रुक जाते हैं। इसके अलावा मेदे और आंतों के जख्मों और मेदे के लिए इसका पानी पीना बहुत मुफीद साबित होता है।

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ख़ून की कमी के लिए

जो लोग ख़न की कमी और कमजोरी की शिकायत करते हैं वह पांच मोटे छुहारे लेकर आधा किलो दूध में डाल कर खूब पकाएं। जब छुहारे नर्म हो जाएं तो उतार कर नीम गर्म खा लें। एक दो हफ्तों में उन्हें ताजगी और कुव्वत महसूस होग़ी।

रग पटठों के लिए

सर्दी के मौसम में कुछ लोग बेहद सदी महसूस करते हैं। रग पटठे कमजोर हो जाते हैं। एक पाव दूध में तीन से पांच छुहारे और थोड़े से चिलगोजे कूटें और जोश देकर उन्हें पी लें। चन्द दिन में यह शिकायत दूर हो जाएगी।

बच्चों के लिए

जो बच्चे कमजोर हों और मोटे होने की ख्वाहिश रखें वह ताजा खजूर के दानें खाकर ताज़ा और गुनगुंना दूध पी लिया करें। चन्द ही दिन में उन्हें फर्क महसूस होगा।

दांत के दर्द के लिए

खजूर की गुठलियां पानी में पका कर इस पानी से गरारे करने से दांतों का दर्द दूर होता है। इसी तरह खजूर को भिगो कर उसका पानी पिया जाए तो खून साफ करती है। उसका रस पानी या दूध में मिला कर पीने से ताकत मिलती है। गुठलियों को भून कर मोटा मोटा कूट कर काफी क़ी तरह भी पिया जाता है।

मेदे की गर्मी के लिए

Khajoor की गुठली एक से तीन अदद लेकर उन्हें पानी या सौंफ में घिस कर चटाने से बदहज्मी दर हो जाती है और मेदे में गर्मी का जोर टूट जाता है। इसी तरह जली हुई गुठली का Powder ज़ख्म पर छिडकने से खून निकलना बन्द हो जाता है।

तब्खीरे मेदा के लिए

गैस और तब्खीरे मेदा में मुब्तिला लोग हस्बे बर्दाश्त तीन से सात छुहारे थोड़े से पानी में डाल कर रात भर खुली जगह पर रख दें। सुबह उठ कर उन्हें खा लिया करें और उनका पानी बाद में पी लें। उसके बाद हलका फुल्का नाश्ता करें तो मेदा दुरुस्त हो जाएगा।

डॉ. तलहा शमीम

Image Credits: Pixabay.com

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