Wafa ke Rishte (महकता आँचल बुक स्टोरी इन हिंदी) खूबसूरत अफ़साना – वफ़ा के रिश्ते – शाइस्ता साजिद

इशा किरन मैं तुमसे मुहब्बत करता हूं, तुम मेरी बात का यकीन क्यों नहीं करती । मुईज कमाल ने उसे बाजू से पकड़ा और अपनी तरफ खींचते हुए पूछा ।

“डोंट टच मी, मुईज़ कमाल तुम मेरे लिए आसमान से तारे भी तोड़ कर ले आओगे न तब भी मैं तुम्हारी बात का यकीन नहीं करूंगी ।”

वह खुद को उसकी गिरफ्त से छुड़ाते हुए बोली । “इसलिए…..इसलिए ना कि तुम उस मिडिल क्लास असफंद यार से मुहब्बत करती हो ।”

मुईज़ ने चुभते हुए लहजे में कहा । “मैं किसी से मुहब्बत करूं या न करूं, मेरी लाइफ है, तुम्हें इसके बारे में पूछने का कोई हक नहीं है ।” वह गुर्राते हुए बोली ।

देखो इशा! मेरी बात समझने की कोशिश करो, जिन्दगी गुज़ारने के लिए सिर्फ मुहब्बत ही काफी नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है ।

वह सब कुछ असफंद यार के पास नहीं है। वह टियूशन पढ़ा पढ़ा कर यूनीवर्सिटी के खर्चे पूरे करता है । वह तुम्हारे खर्चे कैसे बर्दाश्त करेगा ।

तुम ऐशोइ सुकून की आदी हो, तुम मिडिल क्लास के लोगों के माहौल में नहीं रह सकती, मेरे पास दुनिया जहां की, न सिर्फ हर चीज है, बल्कि मैं तुमसे मुहब्बत भी करता हूं।

“मुईज़ कमाल! तुम अपना यह लेक्चर किसी और को सुनाओ, मैं बात में आने वालों में से नहीं हूं। मैंने असफंद यार के अच्छे नेचर, उसकी अच्छी पर्सनाल्टी और उसके अच्छे

केरेक्टर से मुहब्बत की है उसके स्टेटस या फिर उसकी दौलत देख कर नहीं और मुहब्बत इन चीजों की मोहताज नहीं होती आईन्दा मुझे समझाने की कोशिश मत करना, वर्ना अच्छा नहीं होगा।”

वह उसे ख़बरदार करती हुई वहां से चली आई। मुईज़ कमाल ने जमीन पर पांव से जोर से ठोकर मारी, फिर पार्किंग की तरफ आ गया।

क्लासेज छोड़ कर वह गाडी में बैठ कर सड़क पर कुछ देर इधर उधर फिरता रहा फिर थक हार कर घर चला गया।

“इशा कभी कभी मुझे तुम्हारा साथ एक ख्वाब लगता है ऐसा ख्वाब जिसकी ताबीर के बारे में मैं कुछ नहीं जानता ।” असफंद यार ने पानी में कंकर उछालते हुए कहा।

“असफंद तुम ख्याली दुनिया से बाहर आकर हकीकत की दुनिया में आंख खोलो तुम्हारा मेरा साथ ख्वाब नहीं हकीकत है, मैं तुमसे इतना प्यार करती हूं कि तुम्हारे लिए वह सभी आराम छोड सकती हूं ।

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जिन चीजों का लालच देकर मुईज़ कमाल और मेरे घर वाले मुझे तुम से दूर करने की कोशिशों में लगे हैं। वह लोग कभी नहीं समझ सकते कि मुहब्बत इन चीज़ो की मोहताज नहीं होती ।”

वह समझाते हुई बोली फिर असफंद यार की तरफ़ देखा जो खामोशी से सामने पानी में फेंके हुए पत्थर से पैदा होने वाली लहरों को बहुत गौर से देख रहा था । “ओ….ह…हो…. हम क्या बोरिंग टापिक लेकर बैठ गए….चलो केन्टीन चलते हैं ।”

इशा ने उसका हाथ पकड़ कर उसे उठाते हुए कहा । वह चुपचाप उसके साथ चलने लगा। यूं सलीके से याद आते होजैसे बारिश हो वक्‍फे वक्‍फे से मुईज़ कमाल की आवाज पर दोनों ने मुड़ कर देखा।

“यह कहां से आ गया? ” इशा ने बुरा सा मुंह बनाया । “मैं तुम्हारी जिन्दगी में हर जगह नजर आना चाहता हू । ” वह उनके सामने आकर मुस्कुराते हुए बोला ।

“मुईज़ कमाल तुम अपनी हद में रहा करो। “असफंद ने दांत पीसत हुए कहा । “चलो इसके मुँह मत लगो ।”

इशा उसे धकेलते हुए वहां से ले गई। वह नहीं चाहती थी कि यूनिवर्सिटी में उनका तमाशा बने।

“तो फिर क्या सोचा तुमने?” मम्मी ने डिनर के वक्‍त इशा से पूछा। “किस बारे में मम्मी!” वह लापरवाही से बोली ।

“वही मुईज़ कमाल के प्रोप्रोजल के बारे में” उन्होंने कुछ सख्त लहजे में कहा । “प्लीज मम्मी! इस टापिक को यहीं खत्म कर दें, मैंने पहले भी आपसे कहा था आप क्‍यों इस बात को रोजाना दोहराती हैं।”

वह उकताए हुए लहजे में बोली । “बैटा! आप रिलेक्स होकर खाना खाएं, हम फिर कभी बात कर लेंगे।” डैडी ने बहुत नर्म लहजे में कहा ।

“आपने ही इसे बहुत सर पर चढ़ा रखा है, इकलौती होने का यह मतलब नहीं है कि यह असफंद यार जैसे मिडिल क्लास का हाथ थाम ले ।”

वह गुस्से से बोली । ”डैडी! आप ही इस टापिक को लेकर बैठें, सुकून से बात करें या फिर जगड़े, मैं जा रही हूं, मुझे खाना नहीं खाना ।” वह उठ कर चली गई।

महमूद अहमद और सितारा बेगम ने दुख से अपनी लाडली बेटी की तरफ देखा, जो इतनी जिद्दी थी कि जिस बात या काम के पीछे पड़ती, वह करके ही छोड़ती थी। फिर उन दोनों ने भी खाना नहीं खाया।

“असफंद! तुम गांव कब जा रहे हो?” इशा के लहज़े में ऐसा कुछ था कि वह चौंक सा गया। “क्या बात है इशा तुम कुछ परीशान सी लग रही हो?”

असफंद! मुईज़ कमाल ने जब से प्रोपोज़ल भेजा है, मम्मी डैडी मुझसे रोज पूछते हैं, मैं हजार बार मना कर चुकी हू लेकिन वह कहते हैं कि मुईुज कमाल न सिर्फ हमारी क्लास का है, बल्कि उसके डैडी मेरे डैडी के गहरे दोस्त भी हैं, इसलिए मुझे हां कह देना चाहिए ।

इसलिए मैं चाहती हूं की तुम गाव जाकर अपने मां बाप और बहनों को ले आओ ।” इशा की बात पर वह और परीशान हो गया, लेकिन मुस्कुरा कर बोला।

“तुम फिक्र मत करो मैं इसी हफ्ते जाऊंगा और उन्हें ले आऊंगा, लेकिन तुम्हारे घर वाले?” “असफंद वह मेरी जिम्मेदारी है तुम बस उनको ले आओ।”

उसने मुस्कुरा कर उसकी बात काटी। “ओ.के. ठीक है।” वह कुछ मुतमइन सा हो गया, क्योंकि अभी घर जाकर अम्मा को समझाना था, वह मुम्बई इसलिए आया था कि पढ़ कर अच्छी जाब हासिल करेगा और दोनों बहनो की शादी करेगा।

यह तो उसने कभी सोचा ही नहीं था कि यहां वह इशा किरन की मोहबत में इतना डूब जाएगा कि सब कुछ पीछे छोड़ कर उसे ईशा के बार में ही सोचना पड़ेगा।

इस तरह की बातें सोचते हुए वह इशा के साथ लेक्चर अटेंड करने चले गया। “मम्मी! असफंद गांव जा रहा है, वह अपने घर वालों को साथ लाएगा, आपसे बात करने के लिए।

इशा ने सितारा बेगम को जानकारी दी। चाय पीते हुए उन्होंने उसकी बात बुहत गौर से सुनी । फिर कुछ सोचते हुए बोलीं । “तुम भी उसके साथ चली जाओ।”

“जी” वह चौंक गई। “इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है, तुम उसे पसन्द करती हो उससे शादी करना चाहती हो तो शादी से पहले उसका गांव, उसका घर, उसका रहन सहन देख आओ।

मेरे ख्याल में इसमें कोई हरज नहीं। उन्होंने बहुत सुकून से जवाब दिया। “मम्मी! आप कह तो ठीक रही हैं। मैं असफंद से बात करती हू ।

हम कुछ दिन युनीवर्सिटी से आफ कर लेते हैं। वैसे भी फाइनल सिमस्टर होने वाले हैं लेक्चर्ज बहुत कम होते हैं ।” वह म॒स्कराते हुए बोली फिर मोबाइल पर असफंद का नम्बर मिलाते हुए वहां से उठ गई ।

बेगम हमारी बेटी बहुत खुश लग रही है, ऐसा क्या कह दिया तुमने? महमूद साहब ने आते हुए बेटी को खुश देख कर पूछा। “अब हमारी इशा मुईज कमाल से जरूर शादी करेगी ।” वह चाय का कप रखते हुए बोली ।

“मैं समझा नहीं ?” वह कुर्सी पर बैठते हुए बोले । बेगम ने उनके लिए चाय निकालते हुए सारी बात तफ्सील से बताई ।

“तो तुम्हारा क्‍या ख्याल है, वह उसका घर वगैरह देखकर शादी से इन्कार कर देंगी, मुझे नहीं लगता ।” वह चाय का कप पकड़ते हुए बोले ।

“वह मेरी बेटी है, इतना तो उसे मैं जानती हू अगर इन्कार नहीं करेगी तो कुछ लम्हो के लिए सोचेगी जरूर, उसकी सोच में हल्की सी दरार ही उसके सिर से मुहबत का भूत उतार सकती है । सितारा बेगम की बात सुन कर उन्होंने समझते हुए सर हिलाया।


2 Comments

  • Saba · July 21, 2020 at 1:56 pm

    NIce

      Piya · July 30, 2020 at 8:50 pm

      Ye sirf 3 page ki h Kya iska end pura nhi laga

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